दुर्भाग्यवश, एक देशद्रोही एफियाल्टीज ने फारसियों को पहाड़ी रास्ते के बारे में बता दिया। अब फारसी सेना पीछे से घेराव करने में सफल हो गई। यह जानकर राजा लियोनिडास ने अधिकांश यूनानी सेना को वापस जाने की अनुमति दे दी, लेकिन 300 स्पार्टन्स ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। वे जानते थे कि अब मृत्यु निश्चित है, लेकिन स्पार्टा के कानून और सम्मान के लिए पीछे हटना संभव नहीं था। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष किया और वीरगति प्राप्त की।
हालाँकि यह युद्ध तकनीकी रूप से यूनानियों की हार थी, लेकिन इसने पूरे यूनान में जोश भर दिया। 300 स्पार्टन्स के बलिदान ने साबित कर दिया कि संख्या नहीं, बल्कि साहस और देशभक्ति युद्ध जीतने की असली कुंजी है। इसी प्रेरणा से एक साल बाद यूनानियों ने सलामिस के नौसैनिक युद्ध में फारसियों को करारी शिकस्त दी और यूनान को गुलामी से बचा लिया। 300 spartans in hindi
उस समय फारस का शासक ज़ेरक्सेस (Xerxes) विशाल सेना लेकर यूनान पर आक्रमण करने आया था। उसकी सेना लाखों में थी, जबकि यूनानी राज्यों में आपसी एकता का अभाव था। ऐसे में स्पार्टा ने आगे बढ़कर फारसी सेना का मुकाबला करने का निर्णय लिया। स्पार्टा एक ऐसा राज्य था जहाँ बचपन से ही सैनिकों को कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था। 'ढाल के साथ या ढाल पर' उनका आदर्श वाक्य था, यानी या तो विजयी होकर लौटो या वीरगति को प्राप्त होकर ढाल पर लादे जाओ। 300 spartans in hindi